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जिम्मेदारी स्वीकार करें

पहला लीडरशिप गुण – जिम्मेदारी स्वीकार करें (Be Proactive)

दोस्तों…आज हम बात करेंगें “Pro-activity” के बारे में…  यानि कि life में जो कुछ भी होता है जीवन में जो भी घटनाएं होती हैं या तो हम वो करते हैं एक तो approach ये है कि मै करता हूँ , मै अपना सोच समझ कर फैंसला लेता हूँ I और दूसरी approach ये होती है कि मै कहता हूँ कि मै मज़बूरी में ऐसा कर रहा हूँ मै क्या करूं… लोग मुझे ऐसा करने के लिए मजबूर कर रहे हैं… जैसा कोई मुझसे करवा रहा है मै कर रहा हूँ तो पहली approach है जिसमें हम खुद करते हैं ये मानते हैं कि मै जिम्मेवार हूँ उसे हम proactive बोलते हैं और जिसमें हम ये मानते हैं कि मै जिम्मेवार नहीं हूँ वो कोई और… मेरी इस समस्या के लिए कोई और जिम्मेवार है वो reactive approach कहलाती है I

आप देखिये हमें बहुत सारी बातें sentence सुनने को मिल जाते होंगे..कहते हैं कि

“क्या करूं मेरी तो nature ही ऐसी है.. ”

“क्या करूं मुझे गुस्सा नहीं आता लेकिन ये दिलवा देता है , मुझे गुस्सा नहीं आता लेकिन ये दिलवा देता है… ये situation ही ऐसी create कर देता है मै क्या करूं ?”

“क्या करें जी रिश्वत लेनी पड़ती है , सारे ही लेते हैं हम कोई अलग थोड़ी हैं I”

“इस तरह से हम बहुत सारी बातों को …भगवान् ने मेरी किस्मत में सुख लिखा ही नहीं है I”

ऐसी बहुत सारी बातें हमारे जीवन में समाई हुई हैं I ये सारी की सारी reactive approaches हैं इसलिए हम दुखी रहते हैं परेशान रहते हैं I हो सकता है हमारा back ground ऐसा हो या हमारी history ऐसी रही हो जिसके कारण हमारे दिमाग में इस तरह की बातें आती हैं I पर धीरे धीरे ये reactive बातें हमारी nature का हिस्सा बन जाती है हमारी life का एक part बन जाती है I

देखिये ….जीवन में हम या तो proactive होंगें या तो reactive होंगें I या तो हम ये मानेगें कि मै करता हूँ तो होता है ..या फिर बस हो जाता है हम क्या करें ?… ये वाली approach हो गई I तो देखिये कि इन दोनों approaches में फर्क क्या है अंतत: हम क्या चाहते हैं I एक successful इन्सान के जीवन में कौन सी approach होनी चाहिए ?  ये तो आप ..हम अच्छे से समझ सकते हैं कि approach जो है जब तक proactive नहीं होगी जब तक हम ये नहीं मान लेंगें कि मै जिम्मेवार हूँ …तब तक कभी भी अपने अन्दर change नहीं आ सकता ….

 

 

newton’s first law शायद हम सब को पता होगा science जानने वाले हैं ..थोडा सा केवल इतना है कि जब तक हमारे ऊपर कोई force नहीं लगाई जाती ..हम अपनी आराम की ही स्थिति में ही रहना चाहते हैं ..जब तक हम कोई force नहीं लगाई जाती आम तौर पर हम comfort zone में आ जाते हैं I हम comfort zone में आ जाते हैं ये सब हो रहा है ये सब चीज़ें ऐसी ही हैं I अब इसमें क्या change करेंगें और ? हम क्या बदलाव लायें इसमें और ? सब ठीक ठाक तो है भगवान् ने ये ही किया है हमारे लिए I हम किसी न किसी को responsible बनाकर अपने आप को बचा लेते हैं I बस यही फर्क है proactive और reactive के अन्दर ….reactive का मतलब हमारे ऊपर कोई न कोई चीज़ काम कर रही है और हम तो मजबूर हैं हम कुछ नहीं कर सकते …….ये अपने आप को बचाने का तरीका है I ऐसे लोग अगर हम ऐसा विचार रखेंगें तो ऐसे लोग अपने जीवन में कभी भी तरक्की नहीं कर सकते I जो कुछ हो रहा है वो हो रहा है I अपनी life में कभी भी कोई भी change नहीं ला सकते I

हमें proactive बनना है अगर जीवन में सफलता चाहिए ..जो मुझे मेरी consciousness मुझे decision देती है ..मुझे मेहनत से achieve करके दिखाना है … i can do it … i am responsible for what i am …is that simple …जैसा मै हूँ  मै अपने व्यवहार के लिए पूरी तरह जिम्मेवार हूँ I

इस चीज़ को अपने अन्दर accept करना सबसे पहली बात यही है कि responsibility लेना अपनी जिम्मेवारी को आप accept करना कि मै जिम्मेवार हूँ ..जैसे ही ये मानते हैं यकीन मानिए मन के अन्दर से negetivity उसी वक़्त ख़त्म होनी शुरू हो जाती है I हमेशा positive language का इस्तेमाल करना I

किसी और पर किसी चीज के लिए blame नहीं I मेरे से कमी रही होगी तभी मै वहां से फेल हुआ I मुझे और प्रयास करना चाहिए था ये positive language है

हमेशा positive way में मुझे पता है कि मै कर सकता हूँ ..थोडा सा और मन लगाऊंगा थोड़ी सी और हिम्मत जुटाऊंगा तो मै जरुर कर लूँगा … this is the positive language we use always ….सारा खेल जो हैं न इन्हीं शब्दों का ही फर्क है ..इन्हीं शब्दों का ही फर्क है जहाँ हम ये मान लेते हैं कि कि मेरी limitations मै केवल इतना ही हूँ ..तो वहां हम उतना ही होकर रह जाते हैं I और जिस दिन हम कहेंगें कि मै ही जिम्मेवार हूँ मुझे ये काम कर के दिखाना है संसार की कोई ताकत उस काम को होने से रोक नहीं सकती I तो let’s be positive ….let’s create positivity inside …और ये माने कि हम ही जिम्मेवार हैं हमारे जीवन को कोई भी और नही चला रहा हम खुद चला रहे हैं I मेरा व्यवहार कैसा है ? मेरी nature कैसी है ? मेरे actions कैसे हैं ? ये सारी चीज़ें मुझपर depend करती हैं कोई और नहीं …

 

 

हमेशा हम सामने वाले को दोष देते हैं हमेशा हम सामने वाले से ये मांग करते हैं कि तुम ही कुछ करो..मुझसे कुछ नहीं होता तुम ही करो I यकीन मानिए जो जीवन में लोगों पर भरोसा करते हैं लोगों से प्यार पाने की कोशिश करते हैं ऐसे लोग सदा असफल ही रहते हैं ..वो कहते हैं कि लोग हमें प्यार ही नहीं करते और इसी चीज़ का फायदा आज तक हमसे सारे लोग उठाते रहे हैं ..इसी तरह  आप किसी को हाथ दिखाओ वो यही बोलेगा कि बस आप सबके साथ भला करते हो कोई आपके साथ भला नहीं करता I आपके साथ हमेशा बुरा ही होता है और आप ये बात हमेशा मान लोगे क्योंकि आपके बारे में आपने ये positivity बना ही रखी है न ये mind के अन्दर बिठा कर रखा है कि देखो ..मै तो बहुत अच्छा हूँ मै अपने बारे में ये positive image बनाकर ही रखता हूँ I अपने बारे में कौन ये कहता है कि मै अच्छा नहीं हूँ I इस चीज़ का फायदा आज तक लोग हमसे लेते रहे हैं लोग हमारा इस्तेमाल करते रहे हैं I इसके लिए अपने आपको अन्दर जाग्रति लानी पड़ेगी ..ये change अपने अन्दर लाना पड़ेगा कि

I am responsible for whatever I have …

I am responsible for my behaviour ..

I am responsible for whatever I have ..

I am responsible for whatever I will get ..

जो था , जो है और जो होगा वो केवल मेरी जिम्मेवारी है मै जैसा चाहूँ वैसा बना सकता हूँ I

जैसे ही ये मानते हैं हमारी किसी और की बुराईयों  पर से नज़र हट जाती है I

अधिकत्तर लोग जब लोगों पर ही नज़र रखते हैं कि उसने ऐसा किया ..उसने ऐसा किया ये blame game तब खेला जाता है जब हम लोगों को जिम्मेवार मानते हैं अपने आपको बचाने की कोशिश करते हैं I

जैसे ही हम ये मानते हैं कि yes,  the problem is  with me ..एक दम से अन्दर change शुरू होता है परिवर्तन शुरू होता है I और ये परिवर्तन हमेशा क्रांतिकारी होता है अपने अन्दर change होता है ऐसे ही लोग सफल होते हैं जो पहले अपनी ही गलती को स्वीकार करते हैं और फिर change करने की कोशिश करते हैं I उसके लिए तो पहले एक बार इस आग में से गुजरना पड़ता है ..अपमान भी सहना पड़ता है बहुत बार लोग आपके against भी जाते हैं ..लेकिन जब ये आप मान लेते हो कि i am responsible.. मुझे ही करना है ..तो जीवन में बदलाव शुरू हो जाता है….

 

Reactive लोग हमेशा ही ये कहेंगें कि हमारे करने से कुछ नहीं होगा वो तो ये लोग करने थोड़ी देंगें …ये ऐसे ही हैं हम हमेशा लोगों पर थोपते रहेगें ..मै क्या करूं मेरी मज़बूरी है मुझे ऐसा करना पड़ता है ..मतलब या तो हम करेंगें या कोई हमारे ऊपर करेगा ..हम जिम्मेवार हैं या तो कोई और जिम्मेवार है ..अगर हम अपनी बुराईयों  को देखेंगें अपनी कमियों को देखेंगें तो एक दिन सुधार हो भी जायेगा ..अगर लोगों पर थोप देंगें तो हमारी तो लकीर बड़ी हो ही जाएगी ..तो क्या करते हैं कि हम अपनी लकीर को छोटा करने के लिए अपनी गलतियों को छुपाने के लिए लोगों की गलतियों को बढ़ा चढ़कर बताते हैं I ताकि हमारी गलती उसमे दिखाई ही न पड़े ये तरीका केवल अपने आपको बचाने का है I

 

अगर अपने आप में positive change चाहते हैं परिवर्तन चाहते हैं तो जिम्मेवारी को स्वीकार कीजिये … i am responsible for whatever i have..यहाँ से change शुरू होगा ..let’s make it happen ..अपने जीवन के अन्दर क्रांति के बीच ऐसे ही बोने है ..और जीवन में सचमुच सफलता हासिल करके दिखानी है ..be proactive ..be proactive ..act not be active upon …

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