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Punishment Or Results? What do you want ?

सजा या नतीजा क्‍या चाहते हैं आप?

(साभार : onlymyhealth.com)

बच्‍चे बहुत शरारती होते हैं, शरारत करना उनकी फितरत होती है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि उन्‍हें आप बहुत कड़ी सजा दें। क्‍योंकि बच्‍चे आपसे ही सीखते हैं और आप उनके साथ जैसा व्‍यवहार करते हैं उसका सीधा परिणाम उनके व्‍यवहार पर भी पड़ता है।

बच्‍चों की शरारतों पर अगर आपने उन्‍हें कड़ी सजा दी है तो इसका असर उनके दिमाग पर पड़ता है और वे सुधरने की बजाय बिगड़ सकते हैं। इसलिए बच्‍चों को सजा देने से पहले उसके द्वारा होने वाले नतीजों के बारे में सोचिये। इस लेख में विस्‍तार से जानिये कि आपके द्वारा दी गई सजा का आपके बच्‍चे के ऊपर क्‍या प्रभाव पड़ता है।

नतीजा क्‍या है

किसी भी निर्णय का जो परिणाम निकलता है वही नतीजा होता है, कुला मिलाकर यह आपके कार्यों और निर्णयों का परिणाम होता है। यहां पर अच्‍छे और बुरे दोनों तरह के नतीजे मिल सकते हैं।

अगर आप भूख से अधिक खायेंगे तो इसका परिणाम पेट दर्द हो सकता है और कम खायेंगे तो खाना अच्‍छे से पचेगा। यही बात आपके सामान्‍य व्‍यवहार में भी दिखती है, अगर आप किसी के प्रति दयालुता दिखायेंगे तो उसका परिणाम भी वही होगा। अगर बच्‍चों के प्रति आपका व्‍यवहार दयालुतापूर्ण होगा तो वे आगे कम गलतियां करेंगे।

नतीजे करते हैं मदद

किसी भी निर्णय के बाद उसका जो भी नतीजा निकलता है उसका असर सब पर पड़ता है, उसके असर से हम बहुत कुछ सीखते हैं। बच्‍चों को जब अपनी गलती का एहसास होता है तब इसका परिणाम बहुत ही सकारात्‍मक होता है। बच्‍चे इससे बहुत कुछ सीखते हैं, इसके आधार पर भविष्‍य में वे बेहतर विकल्‍प को चुनते हैं और इससे उनका व्‍यवहार बदलता है। अगर कोई कमी रह जाती है तो बच्‍चे उसे सुधारने की कोशिश भी करते हैं।

सजा से अलग होता है नतीजा

आप अपने बच्‍चों को जो भी सजा देते हैं जरूरी नहीं कि उसी के अनुरूप परिणाम आये। दूसरे शब्‍दों में कहा जाये तो नतीजा बच्‍चों के प्रति आपके व्‍यवहार को दिखाता है।

सजा देकर आप अपने बच्‍चे को सही राह पर ला सकते हैं लेकिन कभी-कभी इसका परिणाम आपकी अपेक्षाओं के वीपरीत भी निकल जाता है। बच्‍चे सुधरने की बजाय बिगड़ भी सकते हैं, हो सकता है आपके कड़े रुख के कारण बच्‍चे का स्‍वभाव चिड़चिड़ा हो जाये। इसलिए सजा देने के बाद यह न सोचें कि उसका नतीजा वही आयेगा जो आप चाहते हैं।

समीक्षा जरूर करें

  अगर आप अपने बच्‍चे को सिखाने के लिए, उसे सही व्‍यवहार का ज्ञान देने के लिए, उसके भविष्‍य के लिए अच्‍छी शिक्षा देना चाहते हैं और उसके कारण ही आप उसे लेकर कड़े निर्णय लेते हैं तो उसकी समीक्षा भी कीजिए। अगर आपने अपने बच्‍चे को किसी कारण से सजा दी है तो उसके नतीजे जरूर देखें। अगर इसका परिणाम सकारात्‍मक हो तो ठीक है, लेकिन अगर इसका परिणाम नकारात्‍मक हो तो उसके बारे में सोचें जरूर। हो सके तो उसे बदलने की कोशिश कीजिए।
बच्‍चे आपके व्‍यवहार से ही सीखते हैं, उनका घर ही उनकी प्रथम पाठशाला है, अगर आपके द्वारा दिये गये सजा का बच्‍चे पर नकारात्‍मक असर पड़े तो इसपर विचार कीजिए।

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