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माता पिता का सम्मान – Part 1

हमारे माता-पिता हमारे लिए आदरणीय होते हैं l उन्होंने हमें जन्म दिया है, हमारा पालन-पोषण किया है l उन्होंने हम पर अनगिनत उपकार किये हैं, जिसका बदला चुका पाना असंभव है l वे हमारे पहले गुरु होते हैं l भगवान से भी पहले उनकी पूजा की जाती है l हमारे माता-पिता भगवान का ही रूप होते हैं l भगवान ने हमारी रक्षा के लिए हमारे माता-पिता को भेजा है l माता-पिता की सेवा भगवान की ही सेवा है l माता-पिता की सेवा से भगवान खुश होते हैं l माता-पिता के क़दमों में स्वर्ग होता है, उनके आशीर्वाद से हमें हर क्षेत्र में सफलता मिलती है l उनके आशीर्वाद से हमें हर मुसीबत से छुटकारा मिलता है l उनका आदर करना और अपने से बड़ों का सम्मान करना हमारा सबसे पहला धर्म है l

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दोस्तों ! इस ब्लॉग में एक बार फिर से आपक सभी का स्वागत है l आज हम एक बहुत ही ज़रुरी, बहुत ही important aspect के बारे में बात करेंगे जो आपकी तरक्की के लिए, आपकी सफलता के लिए बहुत ज़्यादा ज़रुरी है, बाकी सारी चीज़ें इसके बाद आती है l सच्चाई यही है कि “This is the first thing that we should be doing.” इसके बाद ही बाकी सब चीज़ों का कुछ meaning बनेगा l Today I am talking about something totally different and this time it is the respect for the most beautiful entity in this world and you know who is that? आपको पता है संसार का सुन्दरतम शब्द क्या है? सबसे प्यारा शब्द क्या है? जानते हैं आप? सबसे प्यारा, सबसे सुन्दरतम शब्द संसार में है – “माँ” l Very beautiful. इसमें इतनी मीठास भरी हुई है ! माँ का पूरा स्नेह, पूरा प्यार……. ! माँ या पिता, यानि दोनों का प्यार l  माँ और पिता का जो दर्जा है वो सचमुच देवताओं से भी कहीं बढ़कर है l हमने परमात्मा को नहीं देखा, हमने भगवान को नहीं देखा, लेकिन हमने अपने माता-पिता को साकार देखा है l हमारे माता-पिता इस संसार में हमारे लिए भगवान का ही रूप हैं l परमात्मा इस सृष्टि का पालन-पोषण करता है, यह हम जानते हैं l लेकिन वो किस ज़रिये से करता है, किस तरीके से करता है? हमारे लिए उनकी representation, परमात्मा का direct manifestations हमारे माँ और बाप हैं l हमारे शास्त्रों में माता-पिता के लिए कहा जाता है – “मातृ देवो: भव:”, माँ देवता के समान है l “पितृ देवो: भव:”, पिता देवता के समान है और “आचार्य देवो: भव:”, हमारे जो teachers हैं वो देवता के समान हैं l

श्री रामचरितमानस में चौपाई आती है – “मात पिता गुरु प्रभ के बानी l बिनहि विचार कहिये शुभ जानी ll” माता-पिता और गुरु की आज्ञा को हितकारी समझ कर उनकी पालना करनी चाहिए l ये सदैव हितकारी वचन बोलते हैं, आपकी भलाई के लिए बोलते हैं, इसलिए उनको देवता-तुल्य माना गया है l माता-पिता की परिक्रमा करने का भी विधान है l परिक्रमा आप समझते हैं? परिक्रमा का मतलब होता है – प्रदक्षिणा, पुण्य प्रदक्षिणा जिसे कहा जाता है l परिक्रमा हमारी हिंदू संस्कृति का बहुत महत्वपूर्ण अंग है l आपने अगर कभी देखा हो कि हम मंदिरों की पूजा करते हैं, यज्ञ की पूजा करते हैं और जिस स्थान पर किसी महापुरुष के चरण पड़े हैं यानी गंगा जैसे स्थान की हम परिक्रमा करते हैं l उस स्थान को पवित्र जानकर उसकी परिक्रमा की जाती है l अधिकतर मंदिरों के बाहर परिक्रमा का एक पथ बना होता है, रास्ता बना होता है, इसलिए इसे ”प्रदक्षिणा” कहा जाता है l माता-पिता की प्रदक्षिणा को बहुत उत्तम गिना जाता है l जब उनके चारों तरफ परिक्रमा की जाती है, उनके चरणों का स्पर्श भी किया जाता है l माता-पिता के चरणों का स्पर्श करने से या बड़े-बुजुर्गों के चरणों का स्पर्श करने से “बल, बुद्धि, विद्या और आयु” मिलते हैं l बल यानि power, बुद्धि यानि intellect, विद्या मतलब पढ़ाई, आयु मतलब age. ये चारों चीज़ें माता-पिता के चरणों को स्पर्श करते ही सहज में ही प्राप्त हो जाती हैं l

अगर आप चरण-स्पर्श की वैज्ञानिक explanation जानना चाहते हैं तो थोड़ा सा आपको बता दें l आप सभी को पता है – Newton के हिसाब से गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत के बारे में आप सभी जानते हैं l गुरुत्वाकर्षण का मतलब यह होता है कि हमारा शरीर एक तरह का चुम्बक है, जिसमें हमारे सिर को उत्तरी ध्रुव और पैरों को दक्षिणी ध्रुव माना जाता है l और किसी भी चुम्बक की जो cycle होती है, वो हमेशा सिर से यानि उत्तरी ध्रुव से शुरू होकर दक्षिणी ध्रुव में खत्म होती है, यह flow होता है l Finally हमारा जो दक्षिणी ध्रुव होता है यानि हमारे जो पैर होते हैं उसमें ये बहुत energy इकठ्ठी हो जाती है l वहाँ एक उर्जा का केंद्र बन जाता है, एक energy का center बन जाता है l अगर आप Reiki वाली भाषा समझते हैं आपको पता हो कि हमारी हाथ-पैरों की उँगलियों से यह energy flow होती रहती है, specially पैरों से l क्योंकि ये पैर इस cycle को पूरा करते हैं, इसलिए ये charged होते हैं l हम अपने बड़ों के चरण-स्पर्श इसलिए करते हैं क्योंकि जब इन चरणों का स्पर्श किया जाता है, हम अपना सिर इन चरणों के अंदर रखते हैं l उन चरणों को अपने हाथों से स्पर्श करके अपने माथे पर लगाते हैं l अपने माता-पिता के चरणों का स्पर्श करके अपने माथे पर लगाते हैं l ये पूरी तरह scientific तरीका है l हमारी science ने, specially हमारे हिंदू धर्म में ये चीज़ हमें बड़ी खूबसूरती के साथ समझाई है l बाकि जगह पर भी, अलग अलग ग्रंथों में, अलग-अलग religion ने इस चीज़ को अच्छे से elaborate किया है l तो चरण-स्पर्श करने से यह ऊर्जा हमें सहज में प्राप्त होती है l इसलिए अपने माता-पिता के चरणों का स्पर्श हमारे लिए बहुत बड़ी सौगात है, हमारे लिए बहुत बड़ी दात है l माता-पिता के चरणों का स्पर्श ज़रूर से ज़रूर किया कीजिये l

सच्चाई तो यह है कि इतनी बड़ी मैं आपको हज़ार-हज़ार चीज़ें समझा रहा हूँ कि सफलता पाने के लिए ये करना चाहिए, वो करना चाहिए l सफलता पाने के लिए, तरक्की करने के लिए, promotion पाने के लिए इस प्रकार से mind power जैसी बहुत सी बातें मैं आपको बताने की कोशिश कर रहा हूँ……. लेकिन दोस्तों केवल एक इस बात को जिसने properly कर लिया, केवल एक अपने माता-पिता का respect जिसने properly कर लिया, उसमें ये सारे गुण default आने शुरू हो जाते हैं l Can you believe that? आप ये विश्वास करते हैं कि माता-पिता के चरणों का स्पर्श करने से, अपने बड़ों के पैर छूने से ये सारी चीज़ें अपने आप आनी शुरू हो जाती हैं l सैंकडों नमस्कार पर एक चरण-स्पर्श करना हज़ार गुना बेहतर होता है l सैकड़ों नमस्कार किए या एक चरण-स्पर्श किया, एक ही बात है l

तरीके से पैरों को छूना है, जैसाकि अभी मैंने बताया l सारी energy का जो center है, वो चरण हैं l एक और जगह पर संतों की वाणी में भी उन्होंने समझाई है यह बात कि “आँख कान मुख नासिका, ऊँचे ऊँचे नाँव l सहजो नीचे कारने सब कोई पूजे पाँव ll” क्योंकि पैर नीचे हैं l बाकी सब अंग ऊपर हैं l पैर नीचे हैं इसलिए हमेशा पैरों की पूजा की जाती है l तो अपने माता-पिता के चरणों का स्पर्श कभी न भूलिए l सुबह उठते ही पहला काम यह करना है l पहले अपने माता-पिता के चरण-स्पर्श करने हैं l थोड़ा सा जल्दी उठने की कोशिश करें, ताकि आप अपने लिए थोड़ा समय निकाल पाएँ l थोड़ा सा जल्दी उठें और अपने माता-पिता के चरणों का स्पर्श करके उनका आशीर्वाद ग्रहण करें l प्रेम से, formality नहीं करनी, फिर बता रहे हैं l दोनों हाथों से दोनों चरणों का स्पर्श कीजिये और अपने माथे पर लगाइए l

और एक बार अपने माता-पिता की प्रत्याक्षना कीजिये l प्रदक्षिणा मतलब उनके चारों और परिक्रमा कीजिये l आप सोचेंगे क्या फायदा होगा? शायद इतिहास में एक उदाहरण सुना हो आपने, एक methodological कथा है l यह कथा बहुत ही प्यारी है l सच है, झूठ है ये हमें नहीं पता l हम आपको जो बता रहे हैं, बड़ी basic सी चीज़ है l भगवान शिव और माता पार्वती के बारे में कहा गया है कि एक बार जब वो बैठे थे तब उनके बच्चों ने, यानि भगवान कार्तिके और उनके भाई गणेश जी के बीच यह ज़िक्र हुआ कि गणेश जी और कार्तिके में से कौन बड़ा है? तो इन्होने कहा – जो भी इस धरती का चक्र तीन बार लगाकर आयेगा, सारे ब्रह्माण्ड का चक्र जो तीन बार लगा लेगा और जो जल्दी पहुँचेगा, वो बड़ा होगा l भगवान कार्तिके ने जल्दी से अपना वाहन उठाया और चक्कर लगाने के लिए दौड़ गए l अब गणेश जी ने सोचा मेरा तो वाहन चूहा है और वो बहुत slow है इसलिए मैं पता नहीं कब चलूँगा और कब पहुँचूँगा l उनके मन में जब ये ख्याल आया कि माता-पिता में ही पूरी सृष्टि समाई हुई है, उनकी परिक्रमा ही मेरे लिए तीनों लोकों की परिक्रमा के समान है l “मातृ देवो: भव: और “पितृ देवो: भव:” यह कहकर उन्होंने बड़े प्यार से हाथ जोड़कर अपने माता-पिता के चारों तरफ तीन चक्कर लगाए और उनके चरणों में अपना सिर रख दिया, प्रणाम कर दिया l सहज ही भगवान प्रसन्न हुए और कहा कि – तुम सहज ही जीत गए हो और अब के बाद से तुम सबसे बड़े गिने जाओगे l तुम्हारी पूजा सबसे पहले होगी l तो देवताओं में इसलिए गणेश जी की पूजा सबसे पहले की जाती है l सिर्फ परिक्रमा के कारण…. l क्योंकि उन्होंने अपने माता-पिता की परिक्रमा की l पहले परिक्रमा करके फिर उनके चरणों को स्पर्श किया l आज के युग में शायद आपको यह बात अटपटी लगे लेकिन दोस्तों अगर सचमुच हमने अपने माता-पिता का सम्मान नही किया, तो यकीन मानिए बाकी सारी चीज़ें बेकार हो जाएंगी l माँ-बाप का आशीर्वाद एक ऐसा कवच है, जो हर समय negativity से आपकी रक्षा करेगा l जीवन में बहुत सारी ऐसी problems आएंगी, बहुत सारी ऐसी बातें होंगी लेकिन माँ-बाप का दिया हुआ प्रेम भरा आशीर्वाद हर पल अपने बच्चों की रक्षा करता है. इसलिए बड़े प्यार से उनको माथा टेका जाए l

और जो भी बड़े बुज़ुर्ग हैं, दादा-दादी हैं, नाना-नानी हैं या अंकल-आंटी कोई बड़े हैं, उनके भी चरण-स्पर्श करने की आदत डालिए l आप कितने भी बड़े हो जाएँ, अपने माँ-बाप से बड़े तो नहीं हैं न l यकीन मानिए इस छोटी सी चीज़ के अंदर हज़ारों गुण समाए हुए हैं l इससे एक चीज़ बड़ी स्पष्ट होती है – नम्रता का भाव l नम्रता एक ऐसा अनमोल गुण है जो आपके इस बाकी सारे गुणों की रक्षा करती है l आप माँ-बाप के चरणों में झुकते हैं, उनका आदर करते हैं और नम्रता का गुण धारण करते हैं तो नम्रता आपके बाक़ी सब गुणों की रक्षा करती है l ये बहुत basic सी बातें हैं, ये हमारे माँ-बाप ने बहुत पहले बचपन में हमें सिखाई हुई हैं l और उनकी respect कर कर के हमने इतना कुछ पाया है कि क्या कहें ! उनके आशीर्वाद से सहज में ही इतनी अनंत दात पाई है, इतनी किरपा और इतनी रहमत पाई है कि जिसका हम ब्यान नहीं कर सकते l That is something specically wanted to pinpoint to put on complete lecture on this particular topic – Respecting the parents is very very very important. बल बुद्धि, विद्या और आयु ये चार चीज़ें सहज आपको मिल रही हैं l बिना कुछ करे l यह मत सझियेगा, इस गलतफहमी से बाहर आ जाइयेगा कि अगर आप ये कहें कि आपके माता-पिता के अंदर तो ज्ञान है नहीं l माफ करना ! अगर ऐसी कोई कल्पना हमारे दिमाग में हो, May be they are not educated, अगर आपको बाहरी education से लगता हो तो l लेकिन संसार में परमात्मा की representation हमारे माँ-बाप हैं l संसार में परमात्मा को हमने नहीं देखा, उनकी direct representation जो है अगर कोई है तो वो माता-पिता हैं l कल को आप भी उसी अवस्था में जाएंगे l आप भी respect पाना चाहेंगे कल को अपने बच्चों से……. हर माँ-बाप कहते हैं न कि बच्चे हमारी respect नहीं करते l दोनों तरफ से आपको बता रहे हैं – माँ-बाप की तरफ से और बच्चों की तरफ से l हम आपको भी समझा रहे हैं कि माँ-बाप के अंदर भी बहुत सारी positive qualities हैं, जिससे आप उनके प्रति attract हों, उनके चरणों से प्यार हो, उनके प्रति आपका प्यार हो l

माँ केवल अपने बच्चे को जन्म ही नहीं देती, अपने शरीर का एक टुकड़ा, एक हिस्सा निकाल कर बाहर रख देती है l इसलिए माँ का अहसान तो जीवन भर भुलाया जा ही नहीं सकता l पिता रक्षा करता है हमारी l उनकी किरपा और उनके प्यार को हम भुला नहीं सकते l तो दोस्तों ! इस चीज़ को अपने दिल में सदा जगह देंगें और सुबह उठकर सबसे पहली चीज़ – अपने माता-पिता के चरणों का स्पर्श करेंगे l अगर आपके कोई इष्ट हैं, उनके चरणों को अगर आप बाद में भी स्पर्श करेंगे तो किसी को कोई आपत्ति नहीं होगी क्योंकि माँ-बाप पहले गुरु हैं l “मातृ देवो: भव:, पितृ देवो:भव:”, उसके बाद “इष्ट देवो: भव:” l जो आपके इष्ट हैं, देवता हैं, जो भी हैं ; उनकी आप बाद में respect कीजिये l खुदा से पहले भी, परमात्मा से पहले भी अपने माँ-बाप का आदर करें l पहले उनके प्रति and then everything else is accepted. ये अपने जीवन का एक मूल मंत्र ले कर चलें कि ऐसा हम कोशिश करेंगे l न केवल उनके चरण-स्पर्श करना है, उनकी परिक्रमा करना, उनकी आज्ञा का पालन भी करना है l Mostly माँ-बाप अपने बच्चों के बारे में कभी बुरा नहीं सोचते l हालांकि इतिहास में बहुत उदाहरण negative और positive बहुत कुछ हैं l लेकिन आप अपने माँ-बाप के प्रति अपना प्रेम और आदर ज़रूर रखिये, Irrespective of whatever feelings you have. आपको पता है feelings कैसे change की जा सकती है? अगर हम आदर का भाव रखते हैं, अगर हम प्रेम का भाव रखते हैं, automatically सारी positive thinking अपने आप ही शुरू हो जाती है l जैसा मैंने पहले भी कहा – It’s all about the law of attraction. उसकी हम जितनी मर्ज़ी जैसे मर्ज़ी explaination दे दें, हम जिस भी तरीके से अपने माँ-बाप की जब respect करते हैं तो automatically उनकी blessings हमें सहज में ही मिलनी शुरू हो जाती हैं l दोस्तों गलती से भी अपने माँ-बाप का दिल नहीं दुखाना l अगर माँ-बाप का दिल दुखाया तो समझ लीजिए बाकी सब चीज़ें आपकी धरी की धरी रह जाएंगी l जितनी मर्ज़ी हमने सफलताएं पाईं हों, जो मर्ज़ी हमने किया हो, अगर माँ-बाप का हमने दिल दुखाया तो फिर हमने कुछ भी नहीं पाया l बहुत कुछ हमें कई बार सुनने को मिलता है, कई बार लोगों से ये complaint भी आती है कि बच्चे माँ-बाप की respect नहीं करते l माफ करना दोस्तों ! समय रहते हुए अपने माँ-बाप के प्रति अपना आदर और प्रेम जगाएं l देखिये हमारे साथ हमारे मन की एक बहुत बड़ी समस्या है l वो समस्या ये है कि जो चीज़ हमें सहज में प्राप्त हो जाती है, हम उसकी क़द्र नहीं करते l

कभी अपने माँ-बाप से दूर जाकर देखिये l कुछ समय के लिए दूर रहिये, देखिये कैसा respect पैदा होता है l अभी हमने एक live example देखा – एक बच्ची का अपनी माँ के प्रति बहुत ज़्यादा disrespect था l “मेरी मम्मी मेरे साथ भेद-भाव करती हैं, मेरी मम्मी भाई को ज़्यादा प्यार करती हैं, छोटी बहन को ज़्यादा प्यार करती हैं, मुझसे प्यार नहीं करती l” ऐसा उस बच्ची के मन में भाव था l कई बार हमारे notice में ये बात आई l अब कुछ समय के लिए उस बच्ची को training लेने के लिए कहीं बाहर जाना पड़ा, किसी दूसरे शहर में जाकर रहना पड़ा l 4-5 महीने वो बच्ची वहाँ रही l और अब जैसे ही वो दूरी पैदा हुई, उसको एकदम से ये realize हुआ – “माँ” क्या होती है l As soon as you are near to that person, usually we try to forget. जो हमें मिला हुआ है, सहज में मिला हुआ है, easily मिला हुआ है ; उसको हम भूल जाते हैं l जैसे ही हम दूर होते हैं, एकदम से उसके प्रति आकर्षण पैदा होता है l That’s what I am saying right now. इससे पहले कि आप उन्हें खो दें, भगवान करें सदा आपके माँ-बाप का साया आपके सिर पर रहे, लेकिन समय बड़ा बलवान है l इससे पहले कि वो समय आए, अपने माँ-बाप को प्रसन्न कर लीजिए l कोशिश करें हम उनको खुश रखें और उनका respect करें l रोज उनके चरणों का स्पर्श करने से automatically हमारा उनके प्रति आकर्षण पैदा होता है l कहीं भी किसी काम पर जाने से पहले, स्कूल-कॉलेज जाने से पहले, अपने माँ-बाप के चरण-स्पर्श करके जाइये और शाम को जब वापिस आएं तो फिर से चरण-स्पर्श कीजिये l माफ करना ! कोई इस चीज़ को यह न समझे कि हम बहुत modern हो गए हैं और ये old fashion बातें हैं l दोस्तों ! मैंने अपने जीवन में जो भी कुछ पाया है, जो मैं ये lecture दे रहा हूँ, ये आपको अच्छा लग रहा है या बुरा लग रहा है, मुझे नहीं पता l let me tell you once again – it’s all the blessings of my mother. Ofcouse my mother and father both together. I am really thankful to them. उनकी कृतज्ञता, उनकी किरपा, उनका अहसान, उनका आधार, उनकी respect मेरे दिल में सदा बनी रहे ! मैं आप सबसे request करता हूँ, मेरी बात केवल इतनी सी है मेरे दोस्तों कि सफलता जैसी सारी चीज़ें माँ-बाप के आशीर्वाद में निहित होती हैं l दिल से माँ एक बार दुआ कर दे, आप यकीन मानिए बाकी सब चीज़ें life में अपने आप positive होनी शुरू हो जाती हैं l माँ और बाप का साया जब तक सिर पर है, उनकी respect करें, उनका आदर करें l बहुत बार ऐसा भी होता है कि छोटी छोटी बातों के लिए हम disagree कर सकते हैं कि – पापा की यह बात ठीक नहीं है, मम्मी ने यह बात की, ये ठीक नहीं की l ऐसा हो सकता है, ऐसा बहुत बार हो सकता है l दोस्तों इस बात को ज़रा गहराई से समझने की कोशिश करें l ये बात अपनी जगह पर है कि parents का ज्ञान, उनकी knowledge अपने level पर limited है l पर फिर भी वो हमारे माँ-बाप हैं l हो सकता है आपको बहुत सारी बातें उनसे अच्छी पता हों, क्योंकि समय बदल चुका है l हो सकता है mobile के बारे में, TV के बारे में, computer के बारे में, latest gagdets के बारे में जितना आपको पता हो, उतना आपके parents को न पता हो l लेकिन उनके पास जो जीवन का अनुभव है, जो experience है, वो आपसे कहीं ज़्यादा है l इसलिए उनके अनुभव के सामने जो चीज़ें आप कल को जूते खा खा कर सीखेंगे, life की जो धक्के खा खा कर सीखेंगे, ये उनके पास सहज में है l कल को ये same चीज़ आप अपने बच्चों के साथ भी repeat करेंगे…… ध्यान रखना, ये कभी मत भूलना ! यहाँ जो हो रहा है, same चीज़ replicate होगी l

आपने अगर इनसे कुछ सीखा है तो definitely same चीज़ आप अपने बच्चों को convey कर पाएंगे l अगर कल आप उनसे respect मांगेंगे कि मेरे बच्चे मेरा respect नहीं करते तो याद रखना आपने अपने माता-पिता का कितना respect किया था l एक ज़रूरत होती है समय पर जाकर, जब वो बुज़ुर्ग चुके हैं, हो सकता है कि वो आपकी सारी बातें न समझते हों l लेकिन वो हर पल आपके साथ हैं l यानि कभी भी आपके against नहीं जाते l बच्चा अपराध भी कर आए, कोई ऐसी problem में भी आ जाए, माँ का दिल अपने बच्चे के लिए कभी दूर नहीं होता l माँ का प्यार अपने बच्चे के प्रति सदा बना रहता है, irrespective of कि बच्चा किस हालत में है l हम प्यार करते हैं या नहीं करते, उनका प्यार बहुत हद तक unconditional होता है l ठीक है, थोड़ा बहुत वो हमसे respect चाहते हैं, सांसारिक हिसाब-किताब है, respect सब चाहते हैं l अगर हम भुला भी देते हैं, हम उनसे दूर होने का प्रयास भी करते हैं कई बार, हम seperate रहना चाहते हैं, हम independent रहना चाहते हैं, हम चाहते हैं कि हमारी अलग identity हो…… l specially teenage में ये problem आती है l teenage में जब आप 12-13 साल से ज़्यादा grow करते हैं, 12-13 साल से नीचे-नीचे जो बच्चा होता है, माँ के आश्रय में रहता है, माँ की शरण में रहता है, माँ के प्यार के साये में पलता है l जैसे ही उसके अंदर थोड़ी सी समझ आनी शुरू होती है, एक independence झलकनी शुरू हो जाती है l वो कहता है कि “मैं कुछ हूँ”, तो उसकी माँ-बाप के प्रति respect कम हो जाती है l

माँ की जगह वो अपने class-fellows को, अपने दोस्तों को देना शुरू कर देता है l मैं आप सबकी बात कर रहा हूँ दोस्तों ! ज़रा समझना इस बात को l किस तरीके से हम अपनी individual identity बनाना चाहते हैं, उस समय में हमारा ध्यान अपने माँ-बाप से दूर हो जाता है l हम किसी भी स्थिति में हैं, हम किसी भी problem में हैं, हम दूर हो रहे हैं……. लेकिन माँ का दिल सदा प्यार से भरा रहता है, ममता से भरा रहता है l वो अपने उस प्रेम को नहीं छोड़ती l आप अगर याद करें अपने माँ-बाप के गुणों को तो बचपन में जब हम छोटे हुआ करते थे, जब तक हम माँ की गोद से निकलना शुरू नहीं हुए थे, इन्हीं माँ का दूध पी पी कर हम बड़े हुए हैं l माँ ने कितनी हमारी संभाल की है l रात को जब हम potty, सुसु कर दिया करते थे, याद करिये उस समय को l बेशक आपको याद नहीं होगा लेकिन किसी को देखकर याद आएगा l और कल को जब आप माँ-बाप बनेंगे, आप को भी पता चलेगी यह बात l बच्चों के लिए कुर्बानियां बड़ी सहज होती हैं और किसी expectations के साथ ऐसा नहीं करते कि “कल को जब मेरे साथ ऐसा होगा, तब ये बच्चा ऐसा करेगा” l No, there is no expectation. जब आप potty, सुसु कर दिया करते थे तो माँ खुद गीली जगह पर लेट जाएगी, आपको तकलीफ न हो, आप को वो सूखी जगह पर लेटा देगी l Remember the time, हमेशा माँ ने अपने प्यार से अपने बच्चे को नवाज़ा होता है, समझाया होता है l

अपने मुंह का टुकड़ा निकाल कर पहले बच्चे को देती है l खुद सबसे बाद में ग्रहण करती है और स्कूल जाते हुए tiffin बना कर देना और स्कूल से आने का इंतज़ार करना, ये माँ के लिए सहज बातें हैं l उसकी ममता का बदला हम कभी नहीं चुका सकते l और इतना प्यार जिस माँ ने किया है, कल को जब बात आती है, कल को हम छोटी-मोटी बातों से मान लीजिए उदाहरण के तौर पर, मैं आपको एक example दे रहा हूँ l आपको एक खास तरह की सब्जी, जो आपको पसंद है, माँ ने वो नहीं बनाई l और इतनी सी बात पर हमने लोगों को यह कहते हुए देखा है कि “तू तो मेरी माँ ही नहीं है l” सिर्फ इसलिए क्योंकि माँ ने उसकी मन पसंद की सब्जी नहीं बनाई l शर्म आती है हमें ये बता कहते हुए ! किसी व्यक्ति-विशेष को नहीं कह रहे हैं l लेकिन दोस्तों अपने दिल से पूछ कर देखें – क्या इतनी छोटी बातों से हम अपने माँ-बाप का respect loose कर देते हैं? इतनी छोटी सी बात के लिए ! और बड़ी बात भी लगा लीजिए – माँ ने जेब खर्ची नहीं दी l तुमने bike मांगी थी, माँ ने वो bike नहीं दिलवा कर दी l पापा ने वो वाला मोबाइल नहीं दिलवाया, जो आप चाहते थे l तो माँ-बाप का respect खत्म हो गया? हम बात ही नहीं करते उनसे ! इतने हमारे नखरे हो गए हैं ! समझ कर देखिये दोस्तों ! माँ-बाप का बदला आप चुका सकते हैं क्या? हमारी इच्छाएँ इतनी बड़ी हो गई हैं कि माँ-बाप का प्यार, माँ-बाप की respect, जो इतना उन्होंने हमारे लिए किया, वो सब भूल गए हैं? वो सब चीज़ों को हम एक छोटी सी बात से तोलना शुरू कर देते हैं, just because उन्होंने थोड़े से पेसें हम पर spend नहीं किये, किसी चीज़ के लिए l वो भी आपको alternative दे रहे हैं l वो कहते हैं – बेटा simple वाला मोबाइल ले ले, क्या करेगा वो complicated वाला मोबाइल ले के, मेरे पास नहीं है इतने पैसे l अगर माँ-बाप ऐसा कह रहे हैं, क्या हमारे दिल में उनके प्रति समझ नहीं आनी चाहिए? इतनी सी बात लेकर हम माँ-बाप के against हो जाते हैं l अपने माँ-बाप की बात को समझने का प्रयास करें दोस्तों ! नहीं तो बहुत पछताएंगे l मैं फिर बता रहा हूँ ये बात l जब वो नहीं रहेंगे न, तो फिर आप बहुत पछताएंगे, बहुत रोएंगे l लेकिन जब दूर जा चुके होंगे, फिर आप जो मर्ज़ी करते रहो, उनकी याद में मंदिर बनवाते रहो, hospital बनवाते रहो, उन बातों से क्या फायदा? उनके जीते-जी उनका सम्मान किया नहीं और मरने के बाद हम जो मर्ज़ी कहानियाँ गाते रहें, कोई मतलब नहीं होगा उस समय में उसका l

इसलिए दोस्तों ! Respect your parents, respect your elders, respect your teachers. उसके बारे में हम फिर detail में बात करेंगे l सबसे ज़्यादा सबसे ज़रुरी बात – अपने माँ-बाप का सम्मान करना न भूलिए l Daily सुबह उठकर अपने माँ-बाप के चरण-स्पर्श करना l कहीं भी जाते हुए माँ-बाप का आशीर्वाद लेकर जाना, घर आते हुए फिर से चरण-स्पर्श करना l माँ-बाप का आशीर्वाद एक protection है, बाहर जाते ही पता नहीं कौन सी चीज़ों ने हमें घेर लेना है, कौन सी problem हमारे लिए तैयार बैठी हो l माँ-बाप का आशीर्वाद एक protection है, एक respect है ; उनके चरणों का स्पर्श करें और “मातृ-पितृ पूजन दिवस” मनाएं l उनका respect ज़रूर करें, उनकी परिक्रमा कर के देखिये l एक बार करके देखिये, आपको पता चल जाएगा l अपने माँ-बाप का प्यार, उनकी रहमत, उनकी किरपा सदा ही हम पर वैसे ही बरस रही है l परमात्मा भी अगर है तो माँ-बाप से भी बाद में है l इस बात को समझते हुए दोस्तों पहले माता-पिता की सेवा करें l

Thank you very much for reading this and I hope this will be continue. एक छोटी से बात कहना भूल गया – रात को सोते हुए फिर से एक बार अपने माँ-बाप का आशीर्वाद लेना न भूलिए l सुबह उठके आशीर्वाद लिया, रात को सोने से पहले हमने आशिर्वाद लिया. बहुत बड़ी चीज़, उनकी blessings आपको मिलेंगी l जिसके कारण बहुत सी life की मुसीबतों से बचे रहेंगे l

Thank you very much.

One comment

  1. Mai Bahoot roya hun ise padkar ke.
    Koi fayda nahi hai mandir or aspataal banwane ka agar aap ne apne maata pita ko choose nahi kia ho.

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