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माता पिता का सम्मान – Part 2

“माँ” इस दुनिया का वो सबसे प्यारा शब्द है, जिसे सुनते ही दिल में प्यार भर आता है l जब इस शब्द को सुनने से ही दिल प्यार से भर जाता है तो माँ के मिलने पर बच्चे की क्या हालत होती होगी? एक बच्चे के लिए माँ से बढ़कर इस दुनिया में कोई नहीं होता l इसलिए हम अपने देश की भूमि को भी “भारत माता” कह कर पुकारते हैं l

माँ जिसकी कोई परिभाषा नहीं,
जिसकी कोई सीमा नहीं,
जो मेरे लिए भगवान से भी बढ़कर है
जो मेरे दुख से दुखी हो जाती है
और मेरी खुशी को अपना सबसे बड़ा सुख समझती है
जिसकी छाया में मैं अपने आप को महफूज़
समझती हूँ, जो मेरा आदर्श है
जिसकी ममता और प्यार भरा आँचल मुझे
दुनिया से सामना करने की ‍शक्ति देता है
जो साया बनकर हर कदम पर
मेरा साथ देती है
चोट मुझे लगती है तो दर्द उसे होता है
मेरी हर परीक्षा जैसे
उसकी अपनी परीक्षा होती है
माँ एक पल के लिए भी दूर होती है तो जैसे
कहीं कोई अधूरापन सा लगता है
हर पल एक सदी जैसा महसूस होता है
वाकई माँ का कोई विस्तार नहीं
मेरे लिए माँ से बढ़कर कुछ नहीं।

mother and father

दोस्तों ! आज हम माँ-बाप के बारे में बात करेंगे, उनके प्रति respect के बारे में बात करेंगे l “माँ” शब्द इतना प्यारा है कि इसके आगे बाकी सारे शब्द तुच्छ जान पड़ते हैं, मतलब meaningless जान पड़ते हैं. If I compare the most beautiful word in this planet, on this earth, is the word “माँ”, “mother”. There could be the other ways to say it but the point is same and “maa” is so sweet. This word is so sweet that you can’t compare anything as this word. माँ-बाप के साथ एक understanding बना कर रखना, पिछले topic में हमने उनकी respect के बारे में बात की थी, उनके चरण-स्पर्श करने के बारे में बात की थी l हमें सभी उनकी आज्ञा का पालन करना चाहिए, जहाँ तक हो सके l माँ-बाप ने जो कहा है उस बात को अपने माथे पर धारण करना l अगर माँ ने कहा है कि “बेटा ! स्कूल से सीधा घर आना” तो स्कूल से सीधा घर ही आना l अगर respect है तो आज्ञा भी तो मानी जाए न, उनकी बात भी मानी जाए l “माँ मैं तुझसे प्यार करता हूँ लेकिन मैं तुम्हारी बात नहीं मानूंगा l” It does not make any sense. ये किस बात का प्यार हुआ, ये किस बात की respect हुई, जहाँ पर आज्ञा न मानी गई, उनकी बात नहीं मानी गई? माँ-बाप की respect करना, उनकी हर बात मानना, जो कहा जाए उस चीज़ को accept करना हमारा कर्तव्य है l अगर किसी कारण से आप disagree करते हैं, नहीं मान पाते उनकी बात को, तो अपने माँ-बाप के सामने खुल कर वो बात बताना l देखो ! जैसे-जैसे age grow करती है, 5-6 साल की उम्र में जब आप-हम थे, तो उस समय तक इतना समझ में नहीं आता l उस समय तक default ही हमने माँ को for granted लिया होता है कि माँ तो सदा ही available है l माफ करना ! जिन लोगों की माँ नहीं है, वो इस बात को अच्छे से realize कर सकते हैं कि माँ के बिना क्या जीवन होता है l तो माँ-बाप के होने के अहसास, उनके प्रति respect उनकी आज्ञा का पालन करना, जहाँ तक हो सके l जितना हो सके उनकी बात को पूरा मानना l कहीं नहीं संभव हो पाया किसी वजह से तो माँ-बाप से माफ़ी मांग लिया करें कि “mother, this is not possible because of this reason.” कोई भी reason हो तो उनसे अपनी बात कहकर finish कर लें मतलब आपस का मन-मुटाव सुलझा लें l हमेशा झुके रहें l Parents का जिसको respect करना आता है, उनके जीवन से समस्याएँ बहुत दूर हो जाती हैं, उनके जीवन की बड़ी-बड़ी बाधाएं दूर हो जाती हैं माँ-बाप के आशीर्वाद से l जैसा पहले भी कहा – “आशीर्वाद से चार चीज़ें हमें सहज में ही प्राप्त होती हैं – बल, बुद्धि, विद्या और आयु l” हम देखते हैं कि जीवन में जो कभी मतभेद होते हैं, हमारे और माँ-बाप के बीच में, तब हमें क्या करना चाहिए? किसी बात पर आप अपने माँ-बाप से agree नहीं करते, आपको नहीं लगता कि उनकी बात logical है क्योंकि शायद उनकी knowledge पुरानी है l

तो प्यार से, respect से अपने माँ-बाप से request करें कि “माँ शायद आपको नहीं पता……” l बात करने का एक style होता है l “माँ आप बहुत प्यारी हो, आपने मुझे सब कुछ दिया है लेकिन ये वाली जो चीज़ है शायद आपको न पता हो l” Respect से, प्यार से कहें l कोई भी इतना गया-बीता नहीं होता कि इस बात को समझ न पाए l Respect अपनी जगह पर होनी ही चाहिए. I seeing people saying like this similar kind of wordings. “ऐ माँ ! तुझे क्या पता, तू चुप रह l” आप माँ को चुप करा रहे हो, जिस माँ ने तुम्हें बोलना सिखाया है, जिस माँ ने तुम्हें ऊँगली पकड़-पकड़ के चलना सिखाया है, उस माँ-बाप को चुप करा रहे हो l ये मैंने बच्चों को कहते हुए सुना है l How bad is that ! माँ-बाप के दिल पर क्या बीतती होगी? कितनी ठेस पहुँचती होगी माँ-बाप पर? और अगर माँ के दिल को दुखाया, तो ये समझ लीजिए कि कुदरत आपको उसकी सज़ा ज़रूर देगी l चाहते हुए भी माँ कुछ नहीं कहेगी लेकिन अगर हल्की सी भी उसके दिल को ठेस पहुंची तो nature, Divinity, Divine, परमात्मा जैसी कोई हस्ती कोई सत्ता है, कोई ताक़त है तो उसे सहन नहीं होता l माँ-बाप का disrespect उससे सहन नहीं होती l माँ तो कुछ नहीं कह रही लेकिन उसका disrespect nature से सहन नहीं होता l

Nature उसकी सज़ा देती है हमें l जिसने कभी अपने माँ-बाप पर हाथ उठाया, उसका तो भला कभी हो ही नहीं सकता l वो जीवन में सुखी नहीं हो सकता l ऐसी ऐसी बीमारियों का ज़िक्र किया गया है हमारे शास्त्रों में…… l माँ-बाप के ऊपर प्रहार करने वाला, माँ को लात मारने वाला, अगर कोई ऐसी अवस्था में होता है, we may be not doing extreme but we heard about the people doing that thing, वो सारा जीवन लकवे का शिकार रहता है l ऐसी हालत हो जाती है कि वो जीवन जीने के लिए तरसता है और उसे जीवन नहीं मिलता, माँ-बाप की disrespect करने से l उस हद तक हम नहीं भी जाते, कई बार अपने शब्दों से भी तो हम अपने माँ-बाप का दिल छलनी कर ही देते हैं न l ठीक है हम हाथ नहीं उठाते लेकिन शब्दों से वार करने में हम परहेज़ भी नहीं करते l “माँ आप चुप रहो, आपको क्या पता l” यह बात मैंने बहुत commonly सुनी है l “पापा क्या आप भी न !” – इस तरह की बातें अपने parents के प्रति…..! क्या उन के दिल पर बीतती होगी, जब ये बातें वो सुनते होंगे? ज़रा कभी अपने आपको उनके पहलू में रखकर देखिये l क्या उनके दिल पर बीतती होगी?

समझने की कोशिश कीजिये दोस्तों ! बेशक हो सकता है हमारा मन-मुटाव न हो, हमारे और उनके बीच में understanding proper न हो, वो हमारी बात को समझ न सकते हो, लेकिन फिर भी बात को प्यार से, respect से कहा तो जा सकता है l नम्रता से, respect से, with humility. “Mamma, I am sorry to say पर शायद आपको यह बात न पता हो l” माँ ऐसी नहीं है कि उसे समझ में नहीं आएगा यह l प्यार से अपना सिर अपनी माँ के पैरों में रख दें, उसकी गोद में रख दें l माँ के गोद से प्यारी और संसार में कौन सी चीज़ है? परमात्मा की गोद का सीधा सीधा साक्षात् रूप माँ है l माँ की respect, पिता की respect करें l हो सकता है कि सबके पापा, सबकी माँ उतनी प्यारी न हो, जितनी छवि बताई जा रही है l कभी ऐसा भी लगता है कि हम माँ-बाप को बहुत सी बातों के लिए दोषी भी ठहराते हैं l हमने बच्चों को माँ-बाप को blackmail करते हुए देखा है l “मम्मी आप तो मुझे प्यार ही नहीं करते, पता है Tony की मम्मी उसको कितना प्यार करती है l”

बच्चे blackmail करते हैं माँ-बाप को. Can you think about? It cannot imagine that. Blackmail कर रहे हैं अपने माँ-बाप को l “आप तो प्यार ही नहीं करते मुझसे, आप भेदभाव रखते हो l” माँ का दिल कभी भेदभाव रख सकता है? हमारी thinking, हमारी सोच इतनी छोटी हो जाती है कि कई बार हम उनको भी अपने equivalent मानना शुरू कर देते हैं l उनकी respect भूलकर अपने बराबर का मानते हैं l अपने दोस्तों को उनसे कहीं ज़्यादा महत्व देते हैं l मम्मी बीमार पड़े हैं, उनको किसी दवाई की ज़रूरत है l उसको छोड़कर अगर हम जाकर अपने दोस्तों के साथ ऐश कर रहे हैं, दोस्तों के साथ movie देखने जा रहे हैं या कुछ भी कर रहे हैं या अपनी पढ़ाई कर रहे हैं, even that is. माँ-बाप की respect अगर हम नहीं कर पा रहे हैं, माँ को भूल कर हम कुछ और भी काम कर रहे हैं, nature यह बर्दाश्त नहीं करती l Nature, कुदरत, ये जो अस्तित्व है, ये जो existence है वो इस बात को सहन नहीं करती l माँ-बाप कुछ नहीं कहते लेकिन यह nature उनका अपमान बर्दाश्त नहीं करती l और माँ-बाप को आप किसी से replace नहीं कर सकते कभी भी l दोस्तों ! कई बार मैंने यह भी देखा है कि अपनी girl friend या अपनी पत्नी के आने पर हम माँ-बाप का respect हम भूल जाते हैं l हम अलग होना चाहते हैं, हम माँ-बाप के साथ नहीं रहना चाहते l

लडकियां भी बहुत बार जब शादी कर के दूसरे घर में जाती हैं तो वो भी आपके माँ-बाप के प्रति वो respect या प्रेम नहीं पैदा कर पाते जो हमारा अपने माँ-बाप के प्रति था l और कई बार हमने यह हालत भी देखी है कि लडकियां वहाँ जाकर भी अपने पति को भड़काती हैं, इस बात के लिए कि हम अलग हो जाएँ, independent हो जाएँ, माँ-बाप के साथ न रहें l ऐसा आपके साथ हो सकता है कि आप उनके प्रति respect न बना पा रहे हों लेकिन दोस्तों आप यह भी समझिए कि जिस माँ ने इस बच्चे को जन्म दिया, बड़ा किया और इस हद तक पहुँचाया, एक समय आता है जब एक दूसरी स्त्री का प्यार उसको अपने माँ-बाप से अलग कर देता है l हम ज़रा इस बात पर ध्यान देंगे और जितना समय हम अपने माँ-बाप के साथ बिता सकें, उनका प्यार, उनकी respect, उनका स्नेह पा सकें, वो हमारे लिए अनमोल दौलत होगी l अगर अपने छोटे से स्वार्थ के पीछे या अपने छोटे से सुख के पीछे अपने माँ-बाप को ignore करके अपना अलग घर बसाते हैं या अपने पति को लड़कियाँ भड़काती हैं कि – हम यहाँ से अलग हो जाएँ, तो आप अपने दिल में यह बात हमेशा याद रखें कि माँ-बाप पर क्या बीतती होगी ! माँ-बाप बीमार हों, उनको किसी तरह की सहायता की ज़रूरत हो और उस समय में आप अपने जीवन के struggle में मस्त हों, आप अपने जीवन की खुशियाँ बटोरने में मस्त हों तो दोस्तों ! आप कभी भी सच्ची खुशियाँ और सच्चा आनंद नहीं पा पाएंगे l हर चीज़ की एक limit होती है l जब हम उनको एक हद से ज़्यादा तंग करते हैं तो माँ-बाप के दिल से भी कभी-कभी बददुआं निकलती है l और माँ-बाप की बददुआं बच्चे के लिए बहुत घातक होती है l कभी दिल से कहा – “तूने अच्छा नहीं किया” l ज़्यादा तो वो कुछ नहीं कहेंगे l “तूने ये अच्छा नहीं किया, ऐसा मत कर” केवल ईतना ही माँ का दिल कहता है, लेकिन उसका प्रभाव बहुत बड़ा होता है l तो दोस्तों समझने की ज़रूरत है l

Please do respect your parents, अपने भी और दूसरों के भी l अपने माँ-बाप के प्रति भी हम respect करते हैं, उनका भी चरण-स्पर्श करते हैं l जिनके घर आप जाएँ उनके भी चरण-स्पर्श करें l अगर किसी और के घर आप जाते हैं, वैसे ही friendship में भी जब आप अपने friends के घर भी जाते हैं, उनका भी चरण-स्पर्श करें l शादी के बाद जब लड़की अपने पति के घर जाती है तो उनको भी अपने माँ-बाप की तरह treat करना, उनकी माँ को अपनी माँ समझना और उनको प्रति भी वैसा ही respect करना – यह बहुत बड़ा virtue है l साथ साथ दोस्तों एक और चीज़ जो हमें समझ लेनी है कि माँ के इस रूप को जो हमने अपने घर में देखा है, इसी प्रकार से उसका जो क़र्ज़ है हमारे ऊपर, वो क़र्ज़ चुकाने के लिए ही हम नारी का in general respect करना सीखें l कोई भी स्त्री, कोई भी नारी माँ का ही रूप है l Even अपनी पत्नी भी, even अपनी spouse भी माँ का ही रूप है l मैं सिर्फ respect की बात कर रहा हूँ l हर एक का अपना-अपना level है, वो अलग बात है l

नारी के प्रति सम्मान और माँ के प्रति सम्मान हमें करना चाहिए l अगर हम बाहरी रूप से representation को देखें – वो है नारी के प्रति सम्मान l अपनी बहन के प्रति, पडौसी की बहन के प्रति, पडौसी के माँ के प्रति, जहाँ तक भी हो सके नारी के प्रति हमारा respect रहें l “यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता l“, जहाँ पर नारियों की पूजा होती है वहाँ पर देवताओं का वास होता है, ऐसा हमाँरे सदग्रंथ हमें बताते हैं l तो यह नहीं है कि नारी केवल मंदिरों में ही पूजने की वस्तु है और जब real उसकी हम बात करते हैं तो उनकी respect हम भूल जाते हैं l ऐसा न करें l नारियों के प्रति जो सम्मान है, वही माँ के प्रति सम्मान का दूसरा रूप है l हमारे देश में अभी भी नारियों को, स्त्रियों को उतना आदर नहीं मिल पाया, जो स्थिति बहुत पहले थी l थोड़ा बहुत सुधार हुआ है लेकिन उस हद तक कभी भी उनको respect नहीं मिल पाया l

 दोस्तों आज भी हमारे कितने ही समाज ऐसे हैं जहाँ पर लड़कियों को पैदा होते ही मरवा दिया जाता है l माफ करना ! बड़ा गंभीर topic है जो दिल को सहज ही ये चीज़ छू जाती है l दिल बड़ा दुखता है इस बात को देखकर कि किस तरीके से इनके साथ कुकर्म बातें सुनने में आती हैं l इतना disrespect हो चुका है कि उसको हमेशा एक भोग की वस्तु की नज़र से ही देखा जाता है l Looks painful. इसके लिए दोस्तों अपनी माँ को याद करें ! Ultimately, एक ही स्त्री के साथ ही आपका सम्बन्ध different type का होगा, जो आपकी पत्नी होगी l इसके अलावा generally आपका जिन भी लोगों से मिलना होता है, जिन भी लड़कियों से हमारा व्यवहार होता है, School, College में या offices में respect का भाव रखें, उसमें भी अपनी माँ का ही रूप देखते हुए l ये बहुत ही ऊँचे level के आदर्श हैं l शायद आप सभी इन चीज़ों को देखकर समझ न पाएँ, लेकिन दोस्तों ये बहुत बड़े level की चीज़ें हैं l You know, हमारी mentality कैसे change हो जाती है? स्त्रियों के प्रति अभी भी हमारे मन में वैसा respect, वैसा भाव नहीं आता l हम उसे एक भोग की वस्तु समझना शुरू कर देते हैं l एक बार फिर याद कीजिये अपनी माँ को l अपनी माँ का रूप जब हम देखना शुरू कर देते हैं बाकी सबके अंदर, तो फिर अपने आप हमारा मन इन चीज़ों से दूर होना शुरू हो जाता है l जब भी मन हमारा खराब हो किसी के प्रति, किसी negative में जाए, तो मन ही मन अपनी माँ को प्रणाम करें l ये याद करते हुए कि मैं आपका रूप सब में देखूं, मुझ पर ऐसी blessings दो !” तो माँ-बाप का respect कर पाना, नारी के प्रति भी आदर रख पाना, यह बहुत ऊँचे level की नैतिक शिक्षा है, अगर आप समझ पाएंगे तो l समाज में advertisement में नारी का रूप ज़रा अजीब दिखाया जाता है l किस तरीके से उनके प्रति disrespect, उसको एक भोग की वस्तु की तरह दिखाया जाता है l किसी भी advertisement में स्त्रियों ने पूरी तरह कपड़े नहीं पहने हुए होते l इस तरह की स्थिति दिखाई जाती है कि हर चीज़ को स्त्रियों के साथ जोड़ा जाता है l एक Display की चीज़ बना कर दिखाया जाता है l केवल दिखाने मात्र के लिए सारी बातें नज़र आती हैं हमारे सामने l दोस्तों ! दिल को बड़ा बुरा महसूस होता है l ज़रा respect रखें – अपनी माँ के प्रति, पिता के प्रति भी, और respect रखें स्त्री जाति के प्रति l जब हमारे दिल में respect होता है न, तो सामने वाले को वो feelings अपने आप पहुँच जाती हैं l

हम और भी चीज़ें अपने lectures में cover करेंगे कि किस तरह से अपनी अंदर की tendencies को बदला जा सकता है l इतना ज़्यादा sex का हमारे mind पर effect होता है कि हमारा मन एक बार उस negative चीज़ को पकड़ता है तो वो सबके प्रति उसी तरह की feeling रखता है l दोस्तों ! मेरी बात को ज़रा गहराई से समझना l You know, what I am saying? I know exactly what keeps going in our mind. सबको समझ में आता है l Face reading से सब कुछ समझ में आता है, Psychology सब समझ में आती है, आपके emotions सब समझ में आते हैं, क्या चल रहा है अंदर में l बहुत बार हमारे अंदर में इतनी ज़्यादा वो चीज़ होती है हमारी feelings होती है, sexuality इतनी ज़्यादा होती है कि वो respect वहाँ पर different emotions में बदल जाता है l अपने पड़ोस की लड़की के प्रति भी हमारा वैसा ही respect रहे जो हमारा अपनी बहन और माँ के प्रति है, अपने स्कूल के लड़कियों के पीछे भी हमारा respect वैसा ही रहे, college की लड़कियों के प्रति भी वैसा ही रहे l उनके प्रति हम क्यों भद्दे comment करते हैं? ध्यान रखियेगा ! और बड़े educated लोग भी…..उन पर comments करना, उनसे छेड़छाड़ करना, ये बातें कहाँ से आती हैं?

अपनी माँ का respect भूल चुके हैं? देखिये ! इस बात को मैं फिर elaborate कर रहा हूँ l कोई एक ही स्त्री होगी जो आपकी पत्नी होगी l बाकी सबके प्रति तो हम प्रेम, respect कर सकते हैं l समझ सकते हैं हम इस बात को? एक respect का भाव लेकर आइये दोस्तों ! समझिए इस बात को l जिस openness की बात पश्चिमी देशों में हम सुनते हैं, ज़रा अपने हिस्दुस्तान के culture में वो चीज़ें applicable नहीं होती l हालांकि बहुत हद तक हम उन्हीं को follow करने लगे हैं लेकिन दोस्तों ! अपने देश की जो संस्कृति है, वो इतनी उत्तम है, इतनी high है कि उसका थोड़ा भी हम उन चीज़ों को समझ पाएंगे तो probably हमारा मन भी उस महानता सत्ता को यानि परमात्मा को भी समझ पाएगा l आध्यात्म के मामले में आज भी हमारा देश नंबर – 1 है और आध्यात्म की शुरुआत इसी basic नियमों से होती है l माँ-बाप का respect अगर नहीं होगा तो हम परमात्मा का क्या respect कर पाएँगे? परमात्मा के साथ हम कैसे जुड़ पाएंगे? Divinity के साथ हम कैसे जुड़ पाएंगे? आज के इस lecture को यही खत्म करते हैं. I hope you might have got some feelings of my feelings and my emotions, Hope you all understand this.

Thankyou very much.

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