Home Mental Health खुशी अपने ही भीतर है, इसे बाहर मत खोजो

खुशी अपने ही भीतर है, इसे बाहर मत खोजो

by Neetu Sharma


हम हर पल हर घड़ी खुश रहना चाहते है । हर पल इसी की खोज मे रहते हैं लेकिन आजकल हम जीतना इसके पीछे भाग रहें हैं। ये उतनी ही हमसे दूर जा रही है । खुशी हमारा स्वभाव है जो कि स्वस्थ हृदय मे उपजती है। आइए इसे अपने भीतर ही तलाशना सीखें ।
अपनी खुशी के लिए कभी दूसरों पर निर्भर मत रहो। तुम्हे तुम्हारे अलावा कोई खुश नही रख सकता जब तक कि तुम खुद मे इसे ना ढूंढ लो। रिश्ते बदलते हैं, लोग बदलते हैं, वक्त के साथ लोगो की सोच भी बदलती है। आज जिस व्यक्ति से तुम्हे प्यार, खुशी मिल रही है क्या पता कल ना मिले, हो सकता है कल जो जगह आपकी हों उनकी जिदंगी मे, कल कोई और लेले। इसलिए सावधान हो जाओ। प्रेम सबसे करो लेकिन डिटेच्ड होकर। यहां हर पल सबकुछ बदल रहा है। हमारे जन्म से अब तक नज़ाने कितने ही रिश्ते छूटें, कितने ही दोस्त आएं और गए और अब न जाने कितने ही छूटने बाकी है अभी, इसलिए इस परम् सत्य को स्वीकार कर जिदंगी जिओ।


दुसरी बात ईर्ष्या छोड़ दो , कभी किसी की खुशी देख के मत जलो, कभी किसी की जीत देख के मत जलो इस दुनिया में सदा कोई न कोई तुमसे बड़ा होगा, तुमसे बेहतर होगा। तुम कब तक दुखी होते रहोगे? दूसरों के साथ तुलना करना छोड़ो। दूसरों की प्रगति को स्वीकारना सीखो।जिस दिन तुम्हारे भीतर से ईर्ष्या समाप्त होगी, तुम पाओगे कि खुशी का झरना तुम्हारे भीतर ही बहने लगा। तुम भीतर से आनंदित रहने लगोगे।


दिल खोलकर हंसो ,इसी क्षण प्रसन्नचित्त हो जाओ। खुश होने के बहाने खोजो, छोटी से छोटी चीजों मे खुशी तलाशने की कोशिश करो। खूब हंसो, दिल खोलकर हंसने की आदत डालो, इसका प्रभाव तुम्हारे शरीर के साथ साथ दिमाग को भी लाभ देगा और तुम सच मे खुस रहने लगोगे।


त्याग और परहित को अपने आचरण मे ले आओ। सबका भला करो। मन मे सेवा भाव रखो।कभी किसी अंधे को सड़क पार कराकर देखो, किसी प्यासे को पानी पिला कर देखो।लोगों से मधुर व्यवहार करके देखो इसमें आपका कोई पैसा खर्च नहीं होगा पर अतुलनीय सुख की प्राप्ति होगी।

क्या आप जानते हैं ऐसा करने से आपके शरीर का हैप्पी हार्मोन ( serotonin) बढ़ने लगता है और आप खुश रहते हो। विश्वास करो कि सारी सृष्टि को रचने वाला परमेश्वर है और हम सभी उसकी संतान है। सभी को उसी का अंश मानकर सबसे प्रेम करें। फिर देखना कैसे खुशी फूटती है तुम्हारे भीतर ।

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