
I Saw Premanand Ji Maharaj as Shri Krishna — A Divine Soul from Vaikuntha Shares Experience
धार्मिक अनुभव और अध्यात्मिक रहस्य हमें हमेशा आकर्षित करते हैं। हाल ही में एक आत्मा ने अपने Past Life Regression में ऐसा अनुभव साझा किया, जिसने भक्तों के दिलों को छू लिया।
उसने स्पष्ट कहा —
“मैंने श्री प्रेमानंद जी महाराज को साक्षात श्री कृष्ण के रूप में देखा है।”
यह अनुभव न केवल दिव्यता से भरा है, बल्कि हमें बैकुंठ धाम और सेवा भाव के रहस्यों को समझने का अवसर भी देता है।
🕉️ बैकुंठ लोक का दिव्य दृश्य
पास्ट लाइफ रिग्रेशन में इस आत्मा ने बताया कि—
- चारों ओर स्वर्णिम प्रकाश और कमल की सुगंध थी।
- दिव्य महलों और सुरम्य सरोवरों से घिरा बैकुंठ लोक, जहां श्रीकृष्ण और राधारानी विराजमान थे।
- असंख्य दिव्य आत्माएं उनकी सेवा और भक्ति में रत थीं।
🙏 प्रेमानंद जी महाराज का स्वरूप
उस आत्मा ने स्पष्ट कहा:
- प्रेमानंद जी महाराज का स्वरूप साक्षात श्री कृष्ण से अलग नहीं है।
- कभी वे स्वयं श्री जी में लीन हो जाते हैं, और कभी अलग रूप में धरती पर सेवा करते हैं।
- ऐसे संतों का इस धरती पर होना एक वरदान और आशीर्वाद है।
🌺 चार प्रकार की मुक्ति का रहस्य
गीता और शास्त्रों के अनुसार मुक्ति के चार स्वरूप बताए गए:
- सालोक्य मुक्ति – भगवान के लोक में वास करना।
- सामिप्य मुक्ति – भगवान के समीप रहना।
- सायुज्य मुक्ति – भगवान के साथ एकाकार हो जाना।
- सरूप्य मुक्ति – भगवान के समान रूप प्राप्त करना।
इस आत्मा ने अनुभव किया कि बैकुंठ में ये सभी अवस्थाएं विद्यमान हैं।
🌸 दिव्य आत्माओं का कार्य
बैकुंठ में मौजूद आत्माएं केवल विश्राम नहीं करतीं, बल्कि:
- भक्ति और प्रेम का प्रसार करती हैं।
- नई आत्माओं को तैयार करती हैं ताकि वे धरती पर आकर सेवा और धर्म का प्रचार करें।
- कुछ आत्माएं स्वयं चुनती हैं कि वे दोबारा धरती पर आएं और मानव जाति का कल्याण करें।
💫 यह अनुभव हमें क्या सिखाता है?
- संत और महापुरुष केवल मनुष्य नहीं, बल्कि दिव्य रूप होते हैं।
- सेवा और भक्ति ही जीवन का सर्वोच्च उद्देश्य है।
- मुक्ति अंतिम पड़ाव नहीं है, बल्कि सेवा में लीन रहना ही सच्चा आनंद है।
यह अनुभव हमें याद दिलाता है कि भगवान और संतों के स्वरूप अनंत और दिव्य हैं।
श्री प्रेमानंद जी महाराज का श्री कृष्ण रूप में दर्शन केवल एक व्यक्ति का अनुभव नहीं, बल्कि भक्तों के लिए भक्ति और विश्वास की प्रेरणा है।