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बच्चों को अच्छी बातें सिखाने का यही सही समय

by Neetu Sharma

कोरोना वायरल के चलते बीते कुछ महीनों से बच्चे घर पर ही हैं। स्कूल तो दूर, बाहर खेलने भी नहीं जा रहे। वे या तो ऑनलाइन क्लास में कुछ घंटे बिताते हैं या इंटरनेट पर। बाकि समय उनका खाली ही रहता है। यानी कुल मिलाकर आपका बच्चा दिनभर आपके आसपास ही रहता है। ऐसे में यही सही समय है, जब आप बच्चों में कुछ अच्छी आदतें डेवलप कर सकते हैं। ऐसी आदतें, जो उन्हें जिंदगीभर काम आयेंगी। हम उन्हें ऐसी सीख दे सकते हैं, जो उन्हें एक अच्छा इंसान बनने में मदद करेंगी।

१. अक्सर मम्मियां बच्चों को पहले खाना खिला देती हैं और बाद में घर के सारे काम निपटाने के बाद अकेले खाना खाने बैठती हैं। बेहतर होगा कि बच्चों के साथ ही बैठकर खाना खाएं। लंच और डिनर दोनों समय अगर मुमकिन न हो तो कम से कम एक वक्त का खाना साथ में खाएं। खाना खाते वक्त बच्चों से बात करें। उन्हें किसानों के महत्व और उनके कठिन परिश्रम के बारे में बताएं. उन्हें ये भी बताएं कि क्यों सभी प्रकार की सब्जियां खाना जरूरी है। उन्हें खाने के फायदे क्या-क्या है और प्लेट में परोसा गया सारा खाना खत्म करना क्यों जरूरी है? खाना बेकार क्यों नहीं करना चाहिए।

२. बच्चों का सारा काम खुद भाग-भाग कर करने कि कोशिश न करें। इससे आप भी थकेंगी और बच्चे आलसी होते जायेंगे। उन्हें काम करने की आदत डालें। उन्हें सिखाएं कि खाने के बाद वे अपनी प्लेट खुद वॉशबेसिन में जाकर रखें। हो सके तो उन्हें प्लेट धोना भी सिखाएं। बच्चों को वॉशिंग मशीन चलाना, साबुन लगाकर हाथों से कपड़े धोना, कपड़े प्रेस करना, अलमारी जमाकर रखना, चादर बिछाना, खिलौने समेटकर रखना जैसे काम खुद करने दें। बच्चा 10-12 साल का हो तो उसे दूध गरम करना, खाना गरम कर अपने हाथ से प्लेट में परोस लेना जैसे काम सिखाएं। ये काम गैस से जुड़े हैं, इसलिए ये अपनी निगरानी में ही करवाएं। सब्जी तोड़ते वक्त, छांटते वक्त भी बच्चों को अपने साथ बैठाएं और उनसे मदद लें। उनसे सलाद बनवा लें। इस तरह के कामों से बच्चे मेहनत की कीमत समझेंगे और अगर कभी उन्हें अकेले रहना पड़ेगा, तो वो परेशान नहीं होंगे। याद रहे कि ये काम उन्हें डांट-डांट कर नहीं करवाने हैं। उन्हें इन कामों को करने की रुचि जगाएं। काम होने पर शाबाशी दें।

३. दादा-दादी, नाना-नानी, चाचा-चाची, मौसी-मौसाजी जैसे तमाम रिश्तेदारों से बच्चों को समय-समय पर मिलवाएं। उन्हें बच्चों के साथ घुलने मिलने दें। उनका प्यार और भावनात्मक सहारा आपके बच्चों के लिए बहुत जरूरी है। उनके साथ तस्वीरें लें। जब आप ऐसा करेंगे, तभी बच्चों को रिश्तों का महत्व समझ आयेगा। वरना वे सिर्फ मोबाइल व दोस्तों के बीच ही सिमट जायेंगे।

४. बच्चों को अपने काम करने की जगह पर लेकर जाएं, जिससे वो समझ सकें कि आप परिवार के लिए कितनी मेहनत करते हैं। भले ही एक-दो घंटे के लिए ही सही, उन्हें उस माहौल को देखने-समझने दें। उन्हें भी पता चले कि आप कितना काम करते हैं, तब जाकर सैलरी घर आती है। इससे उन्हें काम और पैसों का महत्व समझ आयेगा।

५. अपने बच्चों को किचन गार्डन बनाने के लिए बीज बोने के लिए प्रेरित करें. फूलों के पौधे लगाएं। इस तरह जब गार्डन में वे खुद लगाएं गये पौधों से सब्जियां या फूल उगते देखेंगे, तो उनमें अलग ही तरह का उत्साह पैदा होगा। आपके बच्चे के विकास के लिए पेड़ पौधों के बारे में जानकारी होना भी जरूरी है।

६. अपने बच्चों को फैमिली एलबम दिखाएं। रिश्तेदारों के फोटो दिखाकर उनसे रिश्ता समझाएं। उन्हें बचपन के किस्से सुनाएं। अपने परिवार के इतिहास के बारे में बच्चों को बताएं.

७. बच्चों को कुछ लोकगीत सुनाएं। आपकी मातृभाषा मराठी, गुजराती, सिंधी, पंजाबी, जो भी हो, उसके गीत सिखाएं। बच्चों को सीख देने वाली फिल्में दिखाएं। उनके साथ बैठकर देखें।

८. बच्चों को कोर्स के अलावा दूसरी कहानी की बुक्स पढ़ने की आदत डालें। उनके साथ आप भी कोई बुक लेकर बैठें। इस तरह उनका मोबाइल में समय गुजारना कम होगा और अच्छी आदत डेवलप होगी।

९. बच्चों को चॉकलेट्स, जैली, केक, चिप्स, पिज्जा, गैस वाले पेय पदार्थ और समोसे जैसे तले हुए खाद्य पदार्थ देने से बचें। उन्हें घर का बना खाना खाने की आदत डालें।

१०. अपने बच्चों को रोज सुबह नहाकर पूजा करने की आदत डलवाएं। कम से कम भगवान के सामने हाथ जोड़कर उन चीजों के लिए धन्यवाद देना सिखाएं, जो उन्होंने हमें दी हैं। इससे उनके भीतर सकारात्मक सोच पैदा होगी। वे सीखेंगे कि जो हमारे पास है, उसका शुक्र मनाना चाहिए, न कि जो चीज हमारे पास नहीं है, उसके लिए भगवान को कोसना चाहिए।

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