Lord Shiva creating River Narmada from his sweat on Amarkantak hills.
गंगा, यमुना और सरस्वती की तरह ही नर्मदा नदी का हिंदू धर्म में विशेष स्थान है। जहाँ गंगा में स्नान करने से पुण्य मिलता है, वहीं माना जाता है कि नर्मदा के केवल दर्शन मात्र से मनुष्य के पाप धुल जाते हैं। आज 25 जनवरी 2026 को नर्मदा जयंती के अवसर पर, आइए जानते हैं उस रहस्यमयी कहानी को, जो इस नदी को ‘कुंवारी’ और ‘अविनाशी’ बनाती है।
1. भगवान शिव के पसीने से प्राकट्य (The Origin Story)
पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार भगवान शिव अमरकंटक की पहाड़ियों पर गहन समाधि में लीन थे। उनके तप के तेज से उनके शरीर से पसीने की बूंदें गिरने लगीं। उन बूंदों ने एक सुंदर कन्या का रूप ले लिया।
चूंकि इस कन्या ने भगवान शिव (नर्म) को आनंद (दा) प्रदान किया था, इसलिए स्वयं भोलेनाथ ने इनका नाम ‘नर्मदा’ रखा। शिव की पुत्री होने के कारण इन्हें ‘शांकरी’ भी कहा जाता है।
2. नर्मदा को मिला ‘अविनाशी’ होने का वरदान
नर्मदा जयंती का आध्यात्मिक रहस्य उनके द्वारा प्राप्त वरदानों में छिपा है। नर्मदा जी ने भगवान शिव से कई वरदान मांगे थे:
- पापमोचनी शक्ति: जो फल अन्य नदियों में स्नान से मिलता है, वह नर्मदा के दर्शन मात्र से मिल जाए।
- अविनाशी स्वरूप: प्रलय के समय भी नर्मदा का अस्तित्व बना रहे (कहा जाता है कि प्रलय के दौरान भी केवल नर्मदा ही शेष रहती हैं)।
- कंकड़-कंकड़ शंकर: नर्मदा के तल का हर पत्थर (शालिग्राम की तरह) पूजनीय ‘नर्मदेश्वर शिवलिंग’ माना जाता है।
3. नर्मदा और सोनभद्र की अधूरी प्रेम कहानी
नर्मदा को ‘कुंवारी’ नदी क्यों कहा जाता है? लोक कथाओं के अनुसार, नर्मदा का विवाह सोनभद्र (नद) से तय हुआ था। लेकिन अपनी दासी जोहिला के विश्वासघात के कारण नर्मदा ने आजीवन अविवाहित रहने का संकल्प लिया और क्रोध में आकर विपरीत दिशा (पूर्व से पश्चिम) की ओर बहना शुरू कर दिया। आज भी नर्मदा भारत की एकमात्र प्रमुख नदी है जो विपरीत दिशा में बहती है।
4. वैज्ञानिक और आध्यात्मिक लाभ
जैसा कि हमने Ratha Saptami के संदर्भ में चर्चा की, आज का दिन ‘आरोग्य’ का है। नर्मदा का जल ओजोन और विशेष खनिजों से समृद्ध माना जाता है।
- Aura Cleansing: नर्मदा के तट पर किया गया ध्यान आपके Magnetic Aura को तुरंत स्थिर कर देता है। अमरकंटक से लेकर ओम्कारेश्वर तक, इस नदी के किनारे की ऊर्जा साधकों को स्वतः ही समाधि की ओर ले जाती है। [Aura Secrets संदर्भ]
नर्मदा जयंती पर क्या करें? (Practical Tips)
- नर्मदा अष्टकम का पाठ: “त्वदीय पाद पंकजम नमामि देवी नर्मदे…” का पाठ आज के दिन मानसिक शांति और स्थिरता देता है।
- दीपदान: आज संध्या काल में किसी नदी के किनारे या घर के मंदिर में दीपदान करें। यह आपके जीवन के अंधकार (अज्ञान) को मिटाने का प्रतीक है।
- पर्यावरण का संकल्प: माँ नर्मदा को प्रदूषण से बचाना ही उनकी सच्ची सेवा है। आज संकल्प लें कि आप जल स्रोतों को गंदा नहीं करेंगे।
नर्मदा केवल एक नदी नहीं, बल्कि भारत की जीवित संस्कृति और शिव की साक्षात कृपा है। नर्मदा जयंती हमें सिखाता है कि जिस प्रकार नर्मदा विपरीत परिस्थितियों में भी अपना रास्ता खुद बनाती है और निरंतर बहती है, वैसे ही हमें भी अपने जीवन के संघर्षों को पार कर आगे बढ़ना चाहिए।